पटियाला के गांव ढकराबा में 21 कनाल 6 मरला कृषि भूमि को लेकर चार दशक से अधिक समय से चल रही कानूनी लड़ाई का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पटाक्षेप कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल दावा करने से कोई व्यक्ति उत्तराधिकारी नहीं बन जाता। यदि रिश्ते और वसीयत दोनों संदेह के घेरे में हों तो संपत्ति पर अधिकार प्राकृतिक उत्तराधिकारियों का ही रहेगा।
मामला किसान हरनाम सिंह की संपत्ति से जुड़ा है। उनके निधन के बाद वर्ष 1984 में जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। हरनाम सिंह की दो बेटियां हमीर कौर और जागीर कौर थीं। जोगिंदर सिंह ने दावा किया कि वह हरनाम सिंह का पुत्र है और वर्ष 1980 में हरनाम सिंह ने उसके पक्ष में वसीयत कर पूरी जमीन उसे दे दी थी।
दूसरी ओर हमीर कौर ने अदालत में कहा कि जोगिंदर सिंह का उनके पिता से कोई संबंध नहीं है। वह किसी अन्य व्यक्ति का पुत्र है और फर्जी दावे के आधार पर जमीन पर अधिकार जताने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हरनाम सिंह पहले ही अपनी बेटियों और उनके बच्चों के हित में वसीयत कर चुके थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जोगिंदर सिंह की मां के प्रेमी को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। वहीं राशन कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड में भी वह किसी अन्य व्यक्ति का पुत्र दर्ज था। जस्टिस अर्चना पुरी ने कहा कि जब वसीयत के आधार पर प्राकृतिक उत्तराधिकारियों को संपत्ति से बाहर किया जाता है तो सभी संदेह दूर करना जरूरी होता है। अदालत ने प्रथम अपीलीय अदालत का आदेश रद्द कर ट्रायल कोर्ट का फैसला बहाल करते हुए जमीन पर हमीर कौर और दिवंगत जागीर कौर के बच्चों का अधिकार बरकरार रखा।
Picture Source :